रांची2 घंटे पहलेलेखक: पवन कुमार

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  • डॉक्टर नहीं मिल रहे, लिखित परीक्षा नहीं लेने की तैयारी

राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए राज्य सरकार अब स्वास्थ्य सेवा भर्ती नियमों में संशोधन करने जा रही है. इसका प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग ने तैयार कर लिया है। इसके तहत अब राज्य में डॉक्टरों की सीधी नियुक्ति के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी. उम्मीदवारों को उनके एमबीबीएस अंक और कार्य अनुभव से संबंधित प्रमाण पत्र देखने के बाद नियुक्त किया जाएगा।

प्रस्ताव के अनुसार अनारक्षित श्रेणी के आवेदकों को 10 वर्ष की छूट दी जाएगी ताकि अधिक से अधिक संख्या में चिकित्सकों की नियुक्ति की जा सके। यानी 35 साल की निर्धारित उम्र सीमा को बढ़ाकर 45 साल कर दिया गया है. आरक्षित वर्ग और विकलांगों के लिए भी आयु सीमा में छूट दी गई है। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट को भेजा जाएगा। मंत्रिपरिषद की बैठक में मुहर लगाने के बाद संशोधित नियमों के आधार पर नियुक्ति शुरू होगी.

ऐसे होगी आवेदकों के अंकों की गणना

  • 100 अंकों में से 60 एमबीबीएस अंकों के लिए उपलब्ध होगा।
  • डॉक्टरों के लिए तैयार किए जा रहे नए भर्ती नियमों के तहत एमबीबीएस के लिए 60 अंक दिए जाएंगे।
  • पांच प्रति वर्ष की दर से अधिकतम 25 अंक पांच के लिए रखा गया है। विदेश से सभी डिग्री धारकों के लिए एमआईबीएस अंक 50% पर गिना जाना है, बशर्ते वे एमसीआई के साथ पंजीकृत हों।
  • सरकारी या निजी अस्पताल में नियमित या अनुबंध के आधार पर कार्यरत एमबीबीएस डिग्री धारकों को नियुक्ति के बाद कार्य अनुभव और संतोषजनक सेवा के लिए अधिकतम पांच अंक मिलेंगे।
  • पीजी-डीएम-एमसीएच और समकक्ष डिग्री (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त) के लिए 15 अंक दिए जाएंगे।
  • यदि किसी विदेशी विश्वविद्यालय में साढ़े चार साल का एमबीबीएस कोर्स और एक साल की रोटेटिंग इंटर्नशिप की गई है और अगर यह विश्वविद्यालय एमसीआई से मान्यता प्राप्त है तो उनकी डिग्री को मान्यता दी जाएगी।

इसलिए ले रही है सरकार ये फैसला: मौजूदा प्रक्रिया के चलते डॉक्टरों की नियुक्ति में देरी हो रही है.
प्रस्ताव में कहा गया है कि नियुक्ति की वर्तमान प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे राज्य में कई डॉक्टर बाहर चले जाते हैं. स्वास्थ्य विभाग को कोरोना काल में डॉक्टरों की नियुक्ति में इस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा राज्य में सामान्य श्रेणी के डॉक्टरों की नियुक्ति की अधिकतम सीमा 35 वर्ष है. लेकिन कई छात्र डॉक्टरेट पास करने में लगने वाले समय के कारण अधिकतम सीमा को पार कर जाते हैं। कई राज्यों में डॉक्टरों की नियुक्ति की अधिकतम सीमा 45 साल कर दी गई है.

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