बरकागांव१३ घंटे पहलेलेखक: दीपक सिन्हा

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अष्टमी पूजा में शामिल महिला।

बड़कागांव प्रखंड में अश्विनी दुर्गा पूजा कोविड-19 के बाद श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है. प्रखंड के सभी अश्विनी दुर्गा मंदिरों में अष्टमी पूजा की गई जिसमें महिलाओं ने उत्साह से भाग लिया. ज्ञात हो कि बड़कागांव प्रखंड में अश्विनी दुर्गा पूजा की शुरुआत का 125 साल पुराना इतिहास अंबजीत गांव में रचा गया था. दुर्गा पूजा की शुरुआत 1896 ई. में अंबजीत गांव में हुई थी।

अब प्रखंड के अंबजीत, बादाम, गोंडलपुरा, महुगई, हरली, नापो खुर्द, संध, बड़कागांव, उरूब गांवों में मूर्ति पूजा की जा रही है. प्रखंड में पहली बार वर्ष 1896 में अंबजीत गांव में नंदकिशोर सिंह, सुरेंद्रनाथ मिश्रा, श्रीनाथ सिंह, कामेश्वर सिंह, अकुल नारायण दास और सेवक सिंह द्वारा पूजा शुरू की गई थी. इसके बाद नापोखुर्द गांव में 1949 ई. में गैलो साव, श्यामलाल साव, पेटू साव, छतरु साव और सिबा साओ के नेतृत्व में दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई।

इसके बाद 1951 ई. में बड़कागांव डेली मार्केट में। नेटलाल महतो, नरसिंह प्रसाद, डोमन रविदास, कानी साव, धूपन महतो, रामलाल मिस्त्री के नेतृत्व में पूजा शुरू हुई। वर्ष 1958 ई. में गोपाल चंद्र चक्रवर्ती, बुलाकी गोप, महादेव महतो, गोवर्धन महतो, लट्टू महतो द्वारा गोंडलपुरा गांव में पूजा शुरू की गई. वहीं, विदेशी महतो, बाबूलाल महतो, जगदेव महतो, झामन महतो, बिंदेश्वरी महतो के नेतृत्व में 1968 ई. में बादम गांव में दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई.

1969 ई. में रामचरण महतो, लालो महतो, फुकन राणा, तिलक महतो के नेतृत्व में हरली गांव में पूजा की शुरुआत हुई. वहीं 1965 ई. में लोकनाथ सिंह, दशरथ सिंह, चरणदेव सिंह, निर्मल कुमार सिंह, तपेश्वर सिंह के प्रयासों से उरूब गांव में दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई. सन् 1980 ई. में फणीन्द्र महतो, मनोहर प्रसाद, मुरलीधर डांगी, खेमन महतो आदि लोगों के नेतृत्व में संध गांव में पूजा शुरू हुई।

वहीं महुगई गांव में 2005 में पूजा शुरू हुई थी। बरवाडीह दुर्गा पूजा समिति द्वारा वर्ष 2013 से पूजा की जा रही है। पूजा की तैयारी लगभग सभी पूजा समितियों द्वारा पूरी कर ली गई है।

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