रांची5 घंटे पहले

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राज्यपाल रमेश बैस ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों को समन्वय से काम करने के निर्देश दिए हैं. राज्यपाल ने कहा कि मैं उच्च शिक्षा की स्थिति से संतुष्ट नहीं हूं। राज्यपाल ने राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और विश्वविद्यालय में बेहतर बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उच्च शिक्षा विभाग को इस दिशा में निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है.

कहा कि आपसी तालमेल के अभाव में प्रशासनिक अड़चनें दूर करने में काफी देरी हो रही है. जेपीएससी और उच्च शिक्षा विभाग को प्रोफेसर और छात्रों के हित में काम करने की जरूरत है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में जल्द से जल्द स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने यह बातें शुक्रवार को राजभवन में जेपीएससी अध्यक्ष अमिताभ चौधरी उच्च शिक्षा सचिव केके खंडेलवाल के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कही।

बता दें कि प्रदेश के सभी 7 विश्वविद्यालयों में 1500 शिक्षकों और 1400 अन्य कर्मचारियों के पद खाली हैं. उनकी नियुक्ति होनी है। करीब 500 शिक्षकों व अन्य कर्मियों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित है। इसका मुख्य कारण यह है कि राज्य में नियुक्ति और पदोन्नति की नीति नहीं बनाई गई है। राज्यपाल रमेश बैस ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों को समन्वय से काम करने के निर्देश दिए हैं. राज्यपाल ने कहा कि मैं उच्च शिक्षा की स्थिति से संतुष्ट नहीं हूं।

राज्यपाल ने राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, विश्वविद्यालय में बेहतर बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उच्च शिक्षा विभाग को इस दिशा में निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है. कहा कि आपसी तालमेल के अभाव में प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने में काफी देरी हो रही है. जेपीएससी और उच्च शिक्षा विभाग को प्रोफेसरों और छात्रों के हित में काम करने की जरूरत है।

उन्होंने विश्वविद्यालयों में जल्द से जल्द स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने यह बातें शुक्रवार को राजभवन में जेपीएससी अध्यक्ष अमिताभ चौधरी उच्च शिक्षा सचिव केके खंडेलवाल के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कही। बता दें कि प्रदेश के सभी 7 विश्वविद्यालयों में 1500 शिक्षकों और 1400 अन्य कर्मचारियों के पद खाली हैं. उनकी नियुक्ति होनी है। करीब 500 शिक्षकों व अन्य कर्मियों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित है। इसका मुख्य कारण यह है कि राज्य में नियुक्ति और पदोन्नति की नीति नहीं बनाई गई है।

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