लातेहारे7 घंटे पहले

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सुधन बिरहोर का पूरा परिवार करीब 8 साल से झोपड़ी जैसे घर में रहने को मजबूर है।

सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक का दावा है कि आदिम जनजाति बिरहोर परिवार जिनके पास आश्रय नहीं है, उन्हें बिरसा आवास योजना का लाभ दिया जाएगा. लेकिन लातेहार में एक आदिम जनजाति के 12 सदस्यों वाला एक बिरहोर परिवार पत्तों और लकड़ी से बनी झोपड़ी में रहने को मजबूर है। बंगला टोला जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर सदर प्रखंड के बेंडी पंचायत का एक गांव है. जहां आज भी आदिम जनजाति के एक बिरहोर परिवार को बिरसा आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।

सुधन बिरहोर का पूरा परिवार करीब 8 साल से झोपड़ी जैसे घर में रहने को मजबूर है। सुधन बिरहोर के परिवार में 12 लोग हैं। इस झोंपड़ी में सभी एक साथ रहने को मजबूर हैं। हालांकि घर परिवार के एक सदस्य के नाम हो गया है। लेकिन वह भी अभी अधूरा है।

परिवार के पास राशन कार्ड भी नहीं
इस बिरहोर परिवार को सरकारी सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिला है. परिवार के सदस्यों का राशन कार्ड भी आज तक नहीं बना। जिससे राशन भी नहीं मिल पा रहा है। कोरोना काल में जिस परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है उसे भी 10 किलो चावल दिया जाना था। वह भी इस परिवार में नहीं मिला है। वृद्धावस्था पेंशन का लाभ भी नहीं मिल रहा है।

आदिम जनजाति के एक बिरहोर परिवार को आज भी बिरसा आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।

आदिम जनजाति के एक बिरहोर परिवार को आज भी बिरसा आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।

बरसात के दिनों में होती है परेशानी

बिरहोर परिवार के लिए सबसे बड़ी समस्या बरसात के दिनों में होती है। लगातार हो रही बारिश के कारण पूरा परिवार समय बिताने के लिए रात भर जागता रहता है। वह किसी तरह अपनी झोंपड़ी जैसे घर की घेराबंदी कर उसके अंदर रहने को विवश है।

मामले की जानकारी ली। अगर ऐसा है तो उस परिवार को बिरसा आवास का लाभ दिया जाएगा। -मेघनाथ उरांव, बीडीओ, लातेहार

रिपोर्ट पंकज प्रसाद।

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