काहिरा (लोहरदगा)2 घंटे पहले

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अगर नदी पार करने के लिए जुगाड़ नाव का साधन उपलब्ध नहीं है तो लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए करीब 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है.

आजादी के 75 साल बाद भी कैरो और भांद्रा प्रखंड की सीमा पर बहने वाली नंदनी नदी को पार करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है. लोग इस नदी को पार करने के बाद ही लोहरदगा मुख्यालय जा पाते हैं। जुगाड़ नाव का साधन नहीं मिलने पर लोगों को करीब 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. खास बात यह है कि नदी में बाढ़ आने पर जुगाड़ नाव भी रुक जाती है. नदी पर पुल अभी तक नहीं बना है। जहां करीब 85 लाख रुपये की लागत से 2007-08 में पुल के निर्माण का काम शुरू हुआ था, वह भी अब अधूरा है.

बरसात के मौसम में काइरो उत्का, नवतोली, हनहट, सदाबे, ताती, चल्हो आदि दर्जनों गांवों के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए कुडू या भंडारा होते हुए 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. वहीं, पशुपालकों और किसानों को अपनी उपज को भंडारा, कुडू, ब्रेबे, मखमांद्रो बाजारों तक ले जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

2007-08 में नदी में खंभा खड़ा किया गया था, लेकिन कास्टिंग से पहले जांच के बाद पुल निर्माण का काम रोक दिया गया था.

2007-08 में नदी में खंभा खड़ा किया गया था, लेकिन कास्टिंग से पहले जांच के बाद पुल निर्माण का काम रोक दिया गया था.

2007-08 में नंदनी नदी पर बांदा गांव के पास जब पुल का निर्माण शुरू हुआ तो लोगों को लगा कि अब क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा. खंभा नदी में खड़ा किया गया था, लेकिन कास्टिंग से पहले जांच के बाद पुल के निर्माण का काम रोक दिया गया था. अब खंभा भी क्षतिग्रस्त हो रहा है।

पुल निर्माण को लेकर क्षेत्र के लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों, आला अधिकारियों से गुहार लगाई है. क्षेत्र के शरत कुमार विद्यार्थी, लखन उरांव, जमील अख्तर, तबरेज खान, अमलू खान, परवेज खान आदि का कहना है कि पुल के निर्माण को लेकर सभी नेता हर चुनाव में बड़े सपने दिखाते हैं. लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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