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  • वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की जांच की जिम्मेदारी जूनियर को, समिति के गठन पर उठे सवाल

रांची9 घंटे पहले

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फाइल फोटो

  • इस कमेटी को एक साल के भीतर परेल पर गिरफ्तार किए गए बंदियों से जुड़े मामलों की जांच करनी है।

बंदियों को पैसे लेकर परेल पर छोड़ने के मामले की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी पर सवाल उठ रहे हैं. मुख्य सचिव के आदेश पर गृह जेल एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 6 अगस्त को यह कमेटी बनाई थी. इसमें वरिष्ठ अधिकारी की जांच की जिम्मेदारी कनिष्ठ अधिकारियों को दी गई है. अराप अधिकारी वीरेंद्र भूषण जेल आईजी और 2005 बैच के आईएएस रह चुके हैं।

सचिव के पद से सेवानिवृत्त। वहीं, जांच समिति के अध्यक्ष गृह विभाग के अपर सचिव ए. डेड्डे हैं, जो 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. इतना ही नहीं, जेल आईजी मानेज कुमार को समिति में सचिव बनाया गया है, जो 2010 बैच के आईएएस हैं। मानेज कुमार को अपने से कनिष्ठ अधिकारी के अधीन भी काम करना होगा। इसको लेकर नौकरशाही में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।

एक साल में परेल पर गिरफ्तार बंदियों की होगी जांच

इस कमेटी को एक साल के भीतर परेल पर गिरफ्तार किए गए बंदियों से जुड़े मामलों की जांच करनी है। वीरेंद्र भूषण 21 जुलाई 2020 से 31 मई 2021 तक जेल आईजी रहे हैं। उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में कैदियों को पैरालाइज किया गया है। आरोप है कि वीरेंद्र भूषण ने पैसे लेकर बंदियों को परेल पर रिहा करने में मदद की है.

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