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जमशेदपुरएक दिन पहले

  • प्रतिरूप जोड़ना
  • यहां हुई गलती – ठगों को भेजे गए लिंक पर क्लिक किया, जानकारी भी दी
  • Google (खोज इंजन) पर खोजा गया पीएनबी कस्टमर केयर नंबर, 9883876148 मिला

साइबर अपराधियों ने Google पर पंजाब नेशनल बैंक के ग्राहकों की संख्या में बदलाव किया है। इस कॉल पर, साइबर अपराधियों ने एक लिंक भेजा, जिसमें सेवानिवृत्त शिक्षक कामेश्वर नाथ मिश्रा के बेटे शशि शेखर मिश्रा के खाते से 22 बार में कुल 470640 रुपये निकाले गए। घटना शुक्रवार की है। इसके बाद उलीडीह कलिकानगर निवासी चॉकलेट कारोबारी शेखर मिश्रा ने बिष्टुपुर साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत की। शशि शेखर मिश्रा ने बताया- उन्हें एक कार खरीदनी थी। गुरुवार दोपहर दो बजे वह पीएनबी की मानगो शाखा के एटीएम से 25 हजार रुपये निकालने गया था। पहली बार में एटीएम से 15 हजार रुपये निकाले। फिर 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की।

लेकिन पैसा नहीं निकला और खाते से पैसे निकलने का मैसेज आया। जब वे बैंक में शिकायत करने गए, तो एक अधिकारी ने बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल किया और उन्हें शिकायत करने के लिए कहा। उन्होंने Google (खोज इंजन) पर पीएनबी कस्टमर केयर का नंबर खोजा और 9883876148 नंबर पाया। उस नंबर पर शिकायत करने पर दूसरी तरफ से एक लिंक भेजा गया। लिंक के माध्यम से एक वेब पेज खोला गया, जिसमें एटीएम नंबर, एटीएम पिन और खाता संख्या की जानकारी भरने को कहा गया। इसके बाद उन्हें शुक्रवार सुबह 7.30 बजे मोबाइल नंबर 9883981141 से कॉल आया और पैसे लौटाने के लिए कहा गया। सुबह 8 बजे फिर से फोन आया और ओटीपी के बारे में पूछा गया। ओटीपी बताते हुए खाते से 4.70 लाख रुपये निकाल लिए गए।
भास्कर अलर्ट – बैंकों का कस्टमर केयर नंबर 11 नहीं, 10 है

साइबर ठगों ने कई बैंकों के फर्जी कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर डाल दिए हैं। कई लोग इसके शिकार हुए हैं। लेकिन ग्राहकों को यह ध्यान रखने की जरूरत है कि बैंकों की ग्राहक देखभाल संख्या 11 अंक है, जो टोल-फ्री हैं। बैंकों द्वारा 10 अंकों का मोबाइल नंबर जारी नहीं किया जाता है।

एक्सपर्ट की राय- समस्या होने पर सीधे बैंक जाएं, ओटीपी किसी के साथ शेयर न करें

पैसे के प्रति लापरवाह लोग धोखाधड़ी के शिकार होते हैं। साइबर ठगों ने फर्जी लिंक बनाए हैं, जिन्हें फिशिंग कहा जाता है। साइबर ठग उक्त लिंक पर क्लिक करते ही डाटा हैक कर लेते हैं। बैंक कभी भी किसी ग्राहक से फोन पर ओटीपी या खाता संबंधी जानकारी नहीं मांगते हैं। बैंक भी ग्राहकों को संबंधित संदेश नहीं भेजते हैं। जब कागज की आवश्यकता होती है, तो उसे बैंक में आने और उसे जमा करने के लिए कहा जाता है। समस्या होने पर लोग बैंक जाते हैं। ओटीपी, बैंक से संबंधित जानकारी साझा न करें।
आर दयाल, रिटायर डीएसपी

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