चक्रधरपूर: जिले के सिविल सर्जन डॉ मंजू दुबे के कार्यशैली से स्थानीय विधायक सुखराम उरांव नाराज है उनके विधानसभा क्षेत्र में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ है ।पत्र में उन्होंने कहा है कि चक्रधरपूर अनुमंडल अस्पताल में दवा की कमी है ।जहाँ पर उनके वेतन के पैसों से तीन दवा दुकान से दवा मिल रहा है जबकि एंटी रेबीज भी उपलब्ध नही रहने के कारण उनके वेतन के पैसों से दर्ज़नो लोगो को एंटी रेबीज दिया गया।
इसमें सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि आज सरकारी स्वास्थ्य व्यबस्था को संचालन करने में अहम भूमिका निभाने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की विगत 5 माह का वेतन भुगतान नही हुआ है जिसके कारण इनके समक्ष भुखमरी की स्थिति आ गयी है ।
इसी प्रकार बंदगांव में क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा गया कि बंदगांव सरकारी अस्पताल में न तो सेनेटाइजर है आओ ही हैंड ग्लोब्स या मास्क अपनी जान जोखिम में डालकर लोग कार्य कर रहे है

के कार्यशैली से स्थानीय विधायक सुखराम उरांव नाराज है उनके विधानसभा क्षेत्र में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ है ।पत्र में उन्होंने कहा है किचक्रधरपूर अनुमंडल अस्पताल में दवा की।कमी है जहाँ पर उनके वेतन के पैसों से तीन दवा दुकान से दवा मिल रहा है जबकि एंटी रेबीज भी उपलब्ध नही रहने के कारण उनके वेतन के पैसों से दर्ज़नो लोगो को एंटी रेबीज दिया गया।
इसमें सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि आज सरकारी स्वास्थ्य व्यबस्था को संचालन करने में अहम भूमिका निभाने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की विगत 5 माह का वेतन भुगतान नही हुआ है जिसके कारण इनके समक्ष भुखमरी की स्थिति आ गयी है ।
इसी प्रकार बंदगांव में क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा गया कि बंदगांव सरकारी अस्पताल में न तो सेनेटाइजर है आओ ही हैंड ग्लोब्स या मास्क अपनी जान जोखिम में डालकर लोग कार्य कर रहे है
पत्र में उन्होने यह भी कहा कि सिविल सर्जन को डीसी व डीडीसी के द्वारा आदेश दिए जाने के बाद भी वे इस दिशा में पहल नही करते है साथ ही चाईबासा के बदले वे जामशेदपुर में अधिक समय देते है लिहाजा यहां की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है ।
उन्होंने यह भी कहा है कि उनका विस् क्षेत्र नक्सल व अति पिछड़ा इलाका है इसके बावजूद भी लोगो को बेहत्तर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नही है