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  • एचईसी कंपनी के साथ लीज एग्रीमेंट करना भूला, 33 साल बाद याद आया, अब 62 एकड़ जमीन गंवाने का खतरा

रांची19 घंटे पहलेलेखक विनय चतुर्वेदी

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  • 1966 में एचईसी और जीआरएसई कंपनी के बीच कोई समझौता नहीं हुआ था।
  • कंपनी ने कहा- अब लंबे कब्जे के कारण संपत्ति पर उनका अधिकार

गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) एचईसी लीज समझौते पर हस्ताक्षर करना भूल गया। अब उनके सामने 62 एकड़ जमीन छिनने की स्थिति आ गई है। इसके अलावा एचईसी को लीज प्रीमियम और लीज रेंट के रूप में भी करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि वर्ष 1966 में भारत सरकार की इन दोनों कंपनियों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ था।

नए करार करने की बात पर जीआरएसई ने एचईसी से पुराने लीज एग्रीमेंट की कॉपी मांगी, जिसे एचईसी अब तक उपलब्ध नहीं करा पाई है। इस बीच, अब जीआरएसई ने एचईसी को जवाब दिया है कि इस जमीन पर लंबे समय से उसका कब्जा है, इसलिए इस संपत्ति पर उनका अधिकार है। जीआरएसई ने कहा है कि अब इस जमीन के लिए एचईसी के साथ लीज एग्रीमेंट की जरूरत नहीं है।

1966 में मरीन डीजल प्लांट की स्थापना के लिए दी गई जमीन

1966 में, एचईसी ने समुद्री डीजल इंजन संयंत्र की स्थापना के लिए जीआरएसई को 62 एकड़ जमीन दी थी। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के तहत एक कंपनी जीआरएसई और भारी उद्योग मंत्रालय के तहत एक कंपनी एचईसी के बीच 1966 में एक पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने थे। इस बीच, बिहार सरकार से कुछ दस्तावेज मिलने में देरी के कारण मामला स्थगित हो गया और लापरवाही ऐसी थी कि एचईसी प्रबंधन भूल गया कि उसे जीआरसीए के साथ कोई पट्टा समझौता भी करना है।

एचईसी प्रवक्ता ने बैठक का हवाला देते हुए बोलने से किया इनकार, निदेशक कर्मी निकले

एचईसी के प्रवक्ता अभय कुमार कंठ से जब उनके कार्यालय में मुलाकात हुई तो उन्होंने औपचारिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं एचईसी के कार्मिक निदेशक एमके सक्सेना के साथ यह कहते हुए अपने कार्यालय से निकल गए कि उनकी अभी बैठक है।

1999 में खुली थी एचईसी की नींद, अभी तक कोई समझौता नहीं

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार 33 साल बाद 1999 में एचईसी ने जीआरएसई से समझौता करने को कहा। एचईसी ने वन टाइम लीज प्रीमियम के लिए 14.88 करोड़ रुपये की मांग की। इसके बाद जीआरएसई ने एचईसी से पुराने लीज एग्रीमेंट की कॉपी मांगी, जो उसे अब तक नहीं दी गई है।

एचईसी के 121 घरों पर सालों से अवैध कब्जा

सीएजी ने एचईसी के घरों पर अवैध कब्जे का भी खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एचईसी के 121 क्वार्टर पर सालों से लोगों का अवैध कब्जा है। रहने वालों में एचईसी कर्मियों के साथ-साथ बाहरी लोग भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 112 क्वार्टर पर बाहरी तत्वों का कब्जा है और नौ क्वार्टर पर एचईसी के पूर्व कर्मचारी हैं। इससे एचईसी की करोड़ों रुपये की आवासीय संपत्ति से कोई आर्थिक लाभ नहीं हो रहा है।

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