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  • हेमंत सोरेन। मोरहाबादी मैदान की जगह तिरिल सर्वोदय आश्रम में गांधी जयंती कार्यक्रम का आयोजन, मैदान को छावनी में बदला गया

रांची11 मिनट पहले

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गांधी जयंती पर सीएम हेमंत सोरेन और राज्यपाल रमेश बैस ने धुर्वा आश्रम में गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.

पिछले एक सप्ताह से रांची के मोरहाबादी मैदान में 2200 सहायक पुलिसकर्मियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने के कारण इस बार गांधी जयंती का स्थान बदल गया है. पिछले कुछ सालों से मुख्यमंत्री और राज्यपाल लगातार मोरहाबादी मैदान में गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण करते थे. इस बार यह कार्यक्रम धुरवा स्थित छोटानागपुर खादी ग्रामोद्योग संस्थान (सर्वोदय आश्रम) में आयोजित किया गया।

इससे पहले किसी आशंका को देखते हुए शनिवार सुबह से ही मोरहाबादी मैदान को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है. यहां पहुंचने के लिए हर तरह से ड्रॉप गेट बनाकर वहां जवानों की प्रतिनियुक्ति की गई है। इतना ही नहीं, गांधी प्रतिमा के पूरे हिस्से को टिन की चादरों से ढक दिया गया है।

मोरहाबादी मैदान को चादर से ढक दिया गया था ताकि आंदोलनकारी सहायक पुलिसकर्मी बाहर कुछ न देख सकें।

मोरहाबादी मैदान को चादर से ढक दिया गया था ताकि आंदोलनकारी सहायक पुलिसकर्मी बाहर कुछ न देख सकें।

एसडीओ का जवाब- हम इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे
दैनिक भास्कर ने जिले में कानून व्यवस्था की देखरेख करने वाले एसडीओ से पूछा कि क्या 2500 सहायक पुलिसकर्मियों ने सीएम का स्थान बदला तो एसडीओ ने जवाब दिया कि हम इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे. अगला सवाल सुनने से पहले उसने फोन काट दिया।

मोरहाबादी मैदान की ओर जाने वाले हर रास्ते पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

मोरहाबादी मैदान की ओर जाने वाले हर रास्ते पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

पिछली सरकार में पारा शिक्षकों ने बीच कार्यक्रम में सीएम को दिखाया काला झंडा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रशासन को खुफिया जानकारी मिली थी कि अगर सीएम मोरहाबादी मैदान में आते हैं तो सहायक पुलिसकर्मी उन तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं या काला झंडा दिखाकर विरोध कर सकते हैं. रघुवर दास के कार्यकाल में स्थापना दिवस के अवसर पर नाराज पारा शिक्षकों ने कार्यक्रम के बीच में सीएम को काला झंडा दिखाकर विरोध किया.

सहायक पुलिसकर्मी क्यों कर रहे हैं आंदोलन

पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, खूंटी सिमडेगा, गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, लोहरदगा सहित 12 जिलों के 2269 सहायक पुलिसकर्मियों ने तर्क दिया है कि जिलावार लिखित परीक्षा और फिजिकल-मेडिकल पास करने के बाद 2017 में उन्हें बहाल कर दिया गया था. उस समय कहा गया था कि तीन साल की सेवा के बाद जिला पुलिस में बहाली होगी. सरकार बदलते ही उनका अनुबंध रद्द कर दिया गया। प्रदर्शन के बाद 1 साल के लिए बढ़ा दिया गया था। अब उनका आरोप है कि सरकार ने उनके साथ विश्वासघात किया है.

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